ग्रेटर नोएडा के दादरी में आयोजित समाजवादी पार्टी (सपा) की ‘समानता भाईचारा रैली’ के साथ ही उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। इस दादरी में सपा की समानता भाईचारा रैली में सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर निशाना साधा। अपने भाषण में उन्होंने एटीएम, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और एयरपोर्ट जैसे कई मुद्दों को उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए।
दादरी में सपा की समानता भाईचारा रैली
दादरी में आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी देखने को मिली। मंच से बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पंडाल पूरी तरह भरा हुआ है और उसका लाल रंग (सपा के झंडे का प्रतीक) पार्टी के बढ़ते जनसमर्थन को दर्शाता है। उन्होंने रैली के सफल आयोजन के लिए स्थानीय नेता राजकुमार भाटी की सराहना भी की।

सपा ने इस रैली को ‘समानता भाईचारा’ का संदेश देने वाला बताया, जिसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली चुनावी रणनीति के तहत संगठन की मजबूती और जनाधार दिखाने की कोशिश भी है।
एटीएम टिप्पणी को लेकर भाजपा पर तंज
अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘एटीएम’ शब्द को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि रैली में आने से पहले उन्हें एटीएम से जुड़ी कुछ बातें सुनने को मिलीं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पिछले 10 वर्षों से सत्ता में नहीं है, लेकिन कुछ लोग एटीएम के ‘ए’ पर खास मेहरबान रहते हैं।
यह टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का जवाब मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सपा ने नोएडा को ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल किया।
भाजपा की रैली पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने भाजपा की हालिया रैली को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि उनकी रैली की चर्चा से विपक्षी दल घबरा गए और मजबूरी में उनसे पहले रैली करनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की रैली में लोग खुद नहीं आए, बल्कि उन्हें लाया गया था।

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उन्होंने यह भी कहा कि आज के डिजिटल युग में किसी भी चीज़ को छिपाना संभव नहीं है और कई लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा की रैली की वास्तविकता उजागर कर दी है।
सरकारी कर्मचारियों और छात्रों के इस्तेमाल का आरोप
सपा प्रमुख ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, उसे रैली के लिए सरकारी कर्मचारियों और छात्रों का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि एक संस्थान के छात्रों को रैली में बुलाया गया और बदले में छुट्टी देने का वादा किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

एयरपोर्ट उद्घाटन और निजीकरण पर सवाल
अखिलेश यादव ने हाल ही में हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पहले भी कई एयरपोर्ट्स का उद्घाटन हुआ, लेकिन उनमें से कई बंद हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्घाटन के समय यह आश्वासन दिया जाना चाहिए था कि एयरपोर्ट को निजी हाथों में नहीं बेचा जाएगा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उद्घाटन ही बेचने के उद्देश्य से किया गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इंफ्रास्ट्रक्चर और निजीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।
भाजपा का पलटवार और राजनीतिक पृष्ठभूमि
एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा में रैली को संबोधित करते हुए सपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सपा सरकार के दौरान नोएडा को ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल किया गया, जबकि भाजपा सरकार ने विकास को प्राथमिकता दी और लूट पर रोक लगाई।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी 2002 से 2017 के बीच विकास की कमी का मुद्दा उठाते हुए सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा था।
चुनावी माहौल में बढ़ती बयानबाज़ी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। सपा की ‘समानता भाईचारा रैली’ को पार्टी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। वहीं भाजपा भी लगातार रैलियों और उद्घाटनों के जरिए अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रख रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की रैलियों और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला और तेज होगा, क्योंकि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुटे हैं।
